मंगलवार, 11 अगस्त 2009

अलीगढ : एक दौर था जब महानगर के बदनाम बस्ती मदार गेट की रातें घुंघरूओं की छम छम के साथ ठुमरी और दादरा के बोलों से गुलजार हुआ करती थी, लेकिन आज वहां तरानों की जगह वेश्यायों की भद्दी गलियां ही गूंजती हैंसीलन भरी कोथ्रिओं मैं जाने कितनी मासूम सिसकिया यहाँ के कोठों मैं दम तोड देती हैं, इसका हिसाब किसी के पास नही हैबताते हैं की अलीगढ, मेरठ के कोठे , बहला फुसला कर भगाई गई लड़कियों को खपाने का काम यहाँ मुख्यरूप से होता है

आज से साल पहले यंहा नेपाल,असम , पश्चिम बंगाल, बिहार की तवायफें यहाँ कोठों पे मुजरा किया करती थीठुमरी और दादरा के बोलों से पूरा मोहल्ला गुलजार हुआ करता था, बड़े बड़े घरानों के रईस और कदरदान यहाँ आते थे अब सब कुछ बदल गया है , दलालों और गुंडों का बोलबाला है, पुलिस खामोश है क्योंकि यह उनकी कमाई का बहुत बड़ा जरिए हैबल वैश्यावृति खूब जोरों से चालू है

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